हार भी अजीब चीज़ होती है। किसी को समझदार बना देती है। किसी को और ज़्यादा गुस्सैल। कोई हारकर चुपचाप अपने टूटे घर की ईंटें जोड़ता है। कोई हार के बाद भी चौराहे पर खड़े होकर दुनिया को गालियां देता रहता…

कल के सितारों ने बनाई थी भारतीय सिनेमा की रूह

बीहड़ों की धूल, बंदूकों की गूंज और आत्मसमर्पण की आहट

पूंजीवाद के ‘कुरूप’ चेहरे के रूप में उभर रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप

दौलत, रसूख और खौफ की सच्चाई हैं ‘एप्सटीन फाइल्स’

सामरिक महत्व, सतत विकास का अद्भुत उदाहरण है ग्रेट निकोबार परियोजना































