यूरोप की मेरी हाल की यात्रा को अगर एक शब्द में बांधना हो, तो वह शब्द होगा, ‘पानी’। मैंने वहां आधा दर्जन से ज़्यादा नदियां, नहरें और झीलें नज़दीक से देखीं। कभी क्रूज़ पर बैठकर, कभी फेरी…

शब्दों की मर्यादा और अदालतों की गरिमा...

तेजी से उभर रहा है भारत का सुपरकंप्यूटिंग परितंत्र...

‘भगवा चोले’ से ‘विकास की दौड़’ तक उत्तर प्रदेश...

लोकतंत्र की सड़क पर दौड़ता नई तरह का सामंतवाद...

भारत में 'सामूहिक स्वभाव' बन रही है 'स्वच्छता'































