बेटे ने अपनी ही मां को गोली मार दी। भाई खेत के टुकड़े के लिए एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए। बुजुर्ग मां फ्लैट के एक कोने में पड़ी रही, जैसे घर का कोई बेकार सामान। एक युवा प्रोफेशनल अकेलेपन से टूटकर…

अतीत और वर्तमान के प्रेम की दो आवाजें हैं ‘इस तरह आशिकी का...’

यूरोप की चमक-दमक और खाली होती जेब…!

यमुना की बर्बादी पर सरकारी तंत्र बना मूक दर्शक

हसीन वादियों में प्रेम की धुन सुनाता है गीत ‘इन हसीं वादियों से...’

लड़ाई 'समोसा' और 'कचौड़ी' की नहीं, 'न्याय' की है…!
































