जब वोटर भाव नहीं देते, तो कुछ नेता सड़क पर उतर आते हैं। जब दलीलें खत्म होती हैं, तो गाली गलौज शुरू हो जाती है। और, जब जनता साथ नहीं देती, तो क्रांति का ढोल पीट दिया जाता है...

तन्हाइयों में आज भी 'याद' बनकर गूंजता है यह गीत...

पोषक तत्वों से भरपूर है यह ‘बैंगनी’ आलू...

पश्चिमी युवा लड़ रहे बदलाव की लड़ाई, हमारे ‘कॉकरोच’ लगा रहे सियासी सुर!

गायब होता अख़बार, फीका पड़ता टीवी और मुट्ठीभर स्क्रीन का साम्राज्य...

‘दिल में हो...’ के जरिए जब दिल में उतर गईं एक ही धुन पर प्रेम की दो आवाजें...
































